काइज़ेन निरंतर प्रगति की एक जापानी कला

                                               काइज़ेन निरंतर प्रगति की एक जापानी कला 

                                                                    


 

हम सब अपने जीवन में  प्रगति करना चाहते है , लेकिन कहीं न कहीं उसे पूरा करने में अटक जाते है। आखिर इसका कारण  क्या है ?  इसी विषय से सम्बंधित यह लेख है, जिसे पढ़कर आप जान पाएंगे की किस प्रकार आप अपने प्रगति को प्राप्त करने के लिए निरंतर कार्य कर सकते है। आज हम जिस कला के बारे में चर्चा करेंगे वो है जापान की एक प्रमुख कला है, जिसकी शुरुआत जापान के एक प्रमुख व्यक्ति जिनका नाम है "मसाकी हिमाई ", के द्वारा की गयी।  जिसके अभ्यास से लाखो जापानी अपने जीवन को सुधर पाए तथा अपने देश के विकाश में निरंतर योग दान दिया। इसी विशेष कला का नाम काइज़ेन कला है। 

जैसा की हम सब जानते है की जापान विश्वयुद्ध के समय कितनी बड़ी मुसीबतों से गुज़रा ,न्यूक्लिर बमों से जापान के बड़े-बड़े  शहरों की विनाश लीला की कहानी कौन नहीं जानता। आज भी जापान भूकंप और सुनामी जैसे विपदाओं से निरंतर गुजरता है लेकिन फिर भी जापान  के लोगों में ऐसी क्या खास बात है की वो तुरंत ही व्यवस्थित हो जाते है और अपने देश को अपनी सेवा देकर दुबारा उसका कायाकल्प कर देते हैं। तो आज हम  जानेंगे की किस प्रकार जापानी लोग इस कला का उपयोग करते है। 

काइज़ेन दो शब्दों के योग से बना है जिसमें "काइ" का अर्थ बदलाव और ज़ेन का अर्थ है "बेहतरी  के लिए"।  अगर इन दोनों शब्दों का योग किया जाये तो हिन्द में इसे कहेंगे " बेहतरी  के लिए बदलाव "।  हर कोई अपने जीवन में उन्नति चाहता है लेकिन उस काम को शुरू करने में ही घबरा जाता है , क्योंकी हमारा मस्तिष्क एकदम से बदलाव लेन के लिए तैयार नहीं होता।  अतः इसके लिए आवश्यक है की हम इसकी शुरुआत काइज़ेन प्रणाली से करें। 

                                   काइज़ेन पद्धत्ति को उपयोग में लाने की विधियाँ :

                               

काइज़ेन पद्धति को उपयोग में लाना बहुत ही सरल है, लेकीन निरंतरता आवश्यक है।  अगर आप निरंतर इसका अभ्यास नहीं करेंगे तो ये सक्षम नहीं हो पायेगी और आप पुनः अपनी पुरानी  जीवन शैली को जीने के लिए बाध्य होंगे।  अब  हम जानेंगे की किस प्रकार हम इस पद्धति का अभ्यास कर सकते है इसके लिए हमे कोई बड़ा कार्य करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि छोटे-छोटे कदम लेकर आगे बढ़ने की है। कुछ समय बाद आप इतने अभ्यस्त हो जायेंगे की आप उस कार्य को आसानी से कर पाएँगे। 

इसकी अभ्यास को शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको जाँच परख करनी पड़ेगी की वास्तव में आप क्या करना चाहते हैं?  इसमें कई कार्य हो सकते है जैसे अंग्रेजी सीखना, किताब पढ़ने की आदत डालना , व्यायाम करना , या पढाई में सफलता, इत्यादी।  अगर आपने कोई कार्य चुन लिया है तो अब आवश्यक है की आप अब काइज़ेन पद्धत्ति को उपयोग में लाये , इसके लिए आपको कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को अपने जीवन में उतारना है।

            १. आपको क्या करना है उसे चुने और अपनी अवस्थिति का मूल्यांकन करें      

                                                    

आप कोई भी कार्य चुन सकते है स, जैसे की  कुछ सिखने के लिए , स्वास्थ्य  के लिए , करियर के लिए , या कला से जुड़ा कोई कार्य। पहले आप निर्णय करे की आप क्या बदलना चाह्ते है या क्या नया करना चाहते है। अगर आप आलसी स्वाभाव के है और चाहते है कार्य में प्रगतिशील होना तो भी ये अभ्यास आपके लिए बेहतर होगा। अगर आप लेखक बनना चाहते है पर सोचते है की ये आसान नहीं है तो भी काइज़ेन की ये पद्धति आपकी मदद करेगी। हो सकता है आप स्पोर्ट्स में अच्छे होना चाहते हो या वजन काम करना चाहते हो बस एक कोई महत्वपूर्ण कार्य चुन ले। 

साथ ही अपने आस पास के माहौल , समय , अपनी सस्थिती  का ठीक से मूल्यांकन करें। अआप जो कार्य चुन रहे है उस कार्य से आपकी आज की अवस्थिती में क्या परिवर्तन होगा इसके बारे में सोचिए यानि आज आपकी क्या स्थिती है और आप क्या बदलाव चाहते है उसे एक पन्ने में लिख लीजिए। 

                                 २. कार्य को समझे, उसके बारे में ज्ञान अर्जित करें 

                                       

अपने पसंद  के कार्य  को ठीक से समझे उसके बारे में थोड़ा अध्ययन करें। ऐसा करने करे से आपको प्रेरणा मिलेगी और आप उस विषय को जैड़ा जान पाएंगे।  बस आपको उस विषय पर रूचि बनाने के लिए आपको उसके बारे में जानना है।  जैसे अगर आप लेखक बनना चाहते है तो कुवह लेखकों के बारे में पढ़े उस भाषा  के बारे में जाने जिसमे आप लिखना चाहते है, इत्यादि।

                                                          ३. छोटे छोटे कदम बढ़ाये 



अब कार्य को छोटे छोटे भाग में करना प्रारंभ करे लेकिन जागरूकता के साथ इसे रोज़ करें। जैसे - अगर आप स्वस्थ होने की सोच रहे है तो आप बस सीढिया चढ़ने से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।  और इसके लिए आपको जायदा  मेहनत नहीं करनी है बस हर दिन एक  अधिक सीधी चढ़ के उतर जाना है। मानो आज आपने एक सीढ़ी  चढ़ी दूसरे दिन आपने दो सीढ़ी  चढ़ी  और तीसरे दिन तीन सीढ़ी।  अगर आप निरंतर ये अभ्यास करेंगे तो पाएंगे एक दिन आप आराम से पूरी सीढ़ी आसानी से चढ़ रहे है और इसमें आपको कोई म्हणत भी नहीं करनी पड़  रही।  उसी प्रकार अगर आप लेखक  बनना चाहते हैतो बस दरी लीजिए और हर दिन अपने मन में आने वाली विचारों को पैन पे उकेरिये अगर आज आपने दो लाइन लिखा है तो कल उसे तीन लाइन में पूरा करिये ऐसा करने से आप उसमे अभ्यस्त हो जाएंगे। 

                                                 ४. एक साथ अधिक कार्य करने से बचें  

ये बात हमेशा याद रखे की कभी भी कोई कार्य एक साथ करने की क़ोशिश न करें। अगर आप कोई भी कार्य एक साथ जल्दबाज़ी में करने का पर्यत्न  करेंगे तो आपकी उस कार्य में  जल्दी ही रूचि समाप्त हो जाएगी और आप उस कार्य को बिच में चोर देंगे। इसीलिए उत्साह में आकर कभी भी उस कार्य को जल्दबाज़ी में न करें, बल्की धीरे धीरे प्यार से करें। इसका एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है जो की हमारे दिमाग से जुड़ा है , हमारा दिमाग अपनी आदत जल्दी नहीं बदल सकता। अगर आप आज तय करेंगे  की कल से मुझे पांच घंटे रोज़ व्यायाम करना है तो आप इसे कुछ दिन तो कर लेंगे पर थोड़े ही दिनों में आप इसे छोड़ भी देंगे क्योकि आपका मस्तिष्क एक साथ इतना परिवर्तन नहीं झेल पायेगा । अतः पहले दिन बस दो  मीटर दौड़ लगाए और अगले दिन ढ़ाई। 

                                             ५. कार्य को खेल समझ के हमेशा दोहराएँ 

कार्य को खेल समझ कर हर दिन थोड़ा थोड़ा करें ऐसा करने से आपका मस्तिष्क इस आदत को अपना लेगा और आप उस कार्य में माहीर हो  जायेंगे।  आप उसके इतने आदी हो जायेंगे की बड़े से बड़े कार्य को सरलता से पूरा कर लेंगे। और कुछ ही वर्षो में आप उस कार्य के महानतम पायदान पर विराजमान होंगे। अतः एक आदसमय चुने और आदत बना ले की इस समय मुझे इस कार्य को साय देना है भले ही वो थोड़ा समय ही हो और हर दिन उसकी समय सीमा में  थोड़ा वृद्धि करते जाएँ। 

                                                                निष्कर्ष 

                                           

हर कोई अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहता है और उसके लिए प्रयास भी करता है, लेकीन कई बार खुद की आदतों के कारण ही वो सफल नहीं हो पाता। अगर आप भी उस स्तिथि से जूझ रहे हैं तो आप काइज़ेन प्रक्रिया को अपना कर अपने भाग्य में  बदलाव ला सकते है। भले ही आपने कितनी भी मुश्किल काम को क्यों न चुना हो  काइज़ेन इसे सरल बना देगा और आप उस कार्य को सरलता से कर पाएंगे। आपको बस नित्य प्रतिदिन थोड़ा थोड़ा कर के हर दिन प्रयास करना है और उसे सरल रूप में करना है.





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