रावण या राम


वैसे तो हम सब ने रामायण की कहानी बचपन से सुन रखी है कि राम एक आदर्श, मर्यादापुरुषोत्तम, न्याय प्रिय राजा थे और रावण एक क्रूर, दानव, व्यभिचारी राजा था शोषण करना जिसका परम लक्ष्य था। 

परंतु ये बातें कितनी सच है इसका अनुमान तभी लगाया जा सकता है जब आप इस कहानी को तार्किक दृष्टि से समझे न कि धार्मिक।
क्योंकि जब तक आप इस कहानी को धार्मिक दृष्टिकोण से देखेंगे आपको राम महान और रावण नीच ही दिखेंगे लेकिन जैसे ही आप अपने तार्किक मस्तिष्क को इसपर विचार करने देंगे आपको पूरी कहानी उल्टी लगेगी।

तो पहले बात करते है राम की जो अयोध्या के राजा दशरथ के चार पूतों में सबसे ज्येष्ठ पुत्र था जिसकी शिक्षा दीक्षा महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र के द्वारा गुरुकुल में हुई। विद्यार्जन के दौरान ही वो गुरु के संग जनक पुरी विहार को गया जहां सीता का स्वयंवर होना था , जिसमें उसने भी हिस्सा लिया और धनुष खंडित कर विजयी हो सीता से विवाह किया। 

विवाह के उपरांत ही कुछ दिन बाद सौतेली मां के छल से उसे देश निकला गया और वो अपने अनुज लक्ष्मण व भार्या सीता के संग वन को प्रस्थान किया। जहां उसने कई वर्ष पूरे किए और अंतिम कुछ वर्षों में सीता का हरण हुआ फ़िर रावण के साथ युद्ध कर सीता को वापस लाया। ये कहानी हमारे लिए इतनी सरल है कि हम एक स्वर में इसे दोहरा सकते है। 

लेकिन हम रावण के बारे में इतना ही जानते है कि वो एक अभिमानी बालक था जिसने सर्व विद्याएं प्राप्त की थी , उसने स्वर्ण की लंका बनाई थी, उसने सभी देवी देवताओं को जीत कर गुलाम बना रखा था , उसकी सौ पत्नियां थी और दस हजार पुत्र थे, वह अपने अनुज विभीषण के प्रति निर्दयी था, उसने भगवान की भक्ति करने वाले को प्रताड़ित किया ,फलां फलां।

ये बातें जिसने भी लिखीं है इससे एक बात तो प्रमाणित हो गया कि उसका उद्देश्य राम को महान और रावण को नीच बताना है, लेकिन अगर एक तार्किक दृष्टिकोण से इस कहानी को समझा जाए तो हो सकता है जिसके बारे में आपने जो सुना हो वो आपको उल्टा प्रतीत हो।

आइए थोड़ा धर्म से हटकर दिमाग की सुनते है , तो जैसा कि राम के बारे में अपने सुना की वो एक महान राजा था और राम राज्य ने सब एक समान थे न कोई बड़ा था न कोई छोटा  तो में जानना चाहूंगा कि राम के राज्य में ईश्वर आराधना में लीन शूद्र वर्ण के ऋषि शंबूक की हत्या क्यों की गई। क्या राम ने ईश्वर की भक्ति करने वाले को प्रताड़ित नहीं किया। राम की कहानी में आपको बस यही सुनने को मिलेगा वो धोबी था जिसको न्याय दिलाने के कारण राम ने सीता का बहिष्कार किया, नाविक निषाद था जिसकी नौका पे राम बैठे, साबरी भील थी जिसकी जूठन राम ने खाया। इससे साबित क्या हो रहा की राम के राज्य में जातीय व्यवस्था कूट कूट कर भरी हुई थी। 

अयोध्या में स्त्री को एक धन के रूप में समझा जाता था तभी तो स्त्री का किसी के साथ जाना भी अपमान की बात मानी जाती थी वरना पवित्र सीता अग्नि की परीक्षा क्यों देती। अगर अयोध्या में सबको सामान अधिकार थे तो फिर राम को विशेष शिक्षा दी गईं पर धोबी को नहीं क्यों? 

अब चलते है रावण की ओर जहां कोई न ऊंची जाती का था न नीची सभी राक्षस कुल के कहलाते थे। फिर भी हमारे कुछ पाखंडी लेखकों ने उसपे ब्राह्मण होने का टैगलाइन लगा दिया क्योंकि उन्हें ये बात कैसे हज़म हो सकती थी कि राक्षस कुल में कोई विद्वान, महान कैसे हो सकता है ये अधिकार तो सिर्फ ब्राह्मण का है। 

खैर छोड़िए इन बातों को और ध्यान दीजिए रावण की कहानी पर तो रावण एक महान राजा था और मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाने के लायक भी क्योंकि उसके राज में स्त्री पुरुष का कोई भेद नहीं था तभी तो लंका की निगरानी किसी पुरुष नहीं बल्कि स्त्री के हाथों था जिनका नाम अपने सुना ही होगा लंकिनी, सिर्फ इतना ही नहीं अशोक वाटिका की रक्षा का बागडोर ताड़िका के पास था । सभी को स्वर्ण महल आवंटित थी , उपचार के लिए विशेष वैद थे , कई तरह के विशेष उपकरण जैसे पुष्पक विमान इत्यादि उपलब्ध थे जो कि तकनीकी दृष्टिकोण से भी ये साबित करता है कि रावण एक महान राजा था।
 
जबकि अयोध्या को देखे तो वहीं पुराने ढर्रे की संस्कृति, रूढ़िवादी मानसिकता, स्त्री को विशेष अधिकार नहीं , वहां की जनता भी भ्रमित थी और धोबी की बातों से ये भी साबित हो गया कि वो अपने राजा से प्रेम नहीं करती थी वरना कोई लांछन क्यों लगाता। 

अपने रामायण का एक ओर वृतांत जरूर सुना होगा राम ने भीलनी साबरी के झूठे बेर खाए इससे आपको राम की महानता प्रभावित करती होगी चालाकी से ही सही लेखक ने ये साबित करने की कोशिश की कि राम जाती पति से ऊपर थे  परंतु वहीं लक्ष्मण का नाक सिकोड़ना ये साबित करता है कि उनके घर में भील जनजाति के प्रति क्या संस्कार रहे होंगे लेखक को ये बात बतानी ही क्यों पड़ रही है कि जाती में कोई भेद भाव नहीं था जबकि उसने तो पहले ही बता दिया था अयोध्या सबके लिए समान दृष्टिकोण रखती थी ।

रावण भले ही क्रूर था पर अपनी बहन के अपमान का बदला खुद को मिटा कर लिया जबकि राम इतना महान था कि गर्भवती पत्नी को जंगल छोड़ आया। रावण करुणामई भी था तभी सीता उतने दिन लंका में रहकर सुरक्षित रही। जबकि लक्ष्मण के संस्कार इस बात को साबित करते है कि उसकी परवरिश कितनी घिनौनी संस्कृति में हुई की एक छोटे सी बात पर वह तिलमिला उठा और शूर्पणखा जो कि एक स्त्री थी उसके नाक पर प्रहार कर डाला।

अब आप अनुमान लगा सकते है कि ये राम रावण की कहानी थी या आर्यों द्रविडों की लड़ाई ।जिसमें रावण महान  होकर भी महान नहीं है।
धन्यवाद।।

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