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गणपती स्वरुप

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गणेश जी प्रथम पूज्य देव है  जिनकी पूजा हर कार्य के आरम्भ में की जाती है और हम सब ने उनकी प्रतिमा  देखी है, लेकिन उनके वास्तविक स्वरूप के बारे  में हम कम ही जानते हैं। गणेश जी का हर एक अंग का विशेष महत्व है, तो आज हम चर्चा करेंगे और जानेंगे उन विशेष  प्रतीकों के बारे में जिसका धारण करने से आप भी अपने जीवन में गणपती  के सामान विघ्नहर्ता बन सकते हैं।  हम सब ने बचपन से ही प्रभु गणेश की ये कहानी सुनी है, की उनका जन्म पार्वती ने अपने बदन के मैल से किया और अपने  स्नान कक्ष के बहार पहरा लगाने को कहा, ताकी कोई भीतर प्रवेश नहीं कर सके । तभी कुछ क्षण बाद उमापति महेश का आगमन हुआ और जब उन्होंने कैलाश में प्रवेश करना चाहा, तो  गणेश ने उन्हें रोक दिया क्योंकी उन्होंने अपने पिता को ही नहीं पहचाना। इसपर महादेव क्रोधित हो गए और क्रोधवश उस हठी बालक का शीश काट दिया, इसपर पार्वती क्रोधित हो बहार आयी और महादेव  को उस बच्चे को जीवित करने को कहा।  इसपर महादेव ने पास गुजरते एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर उस बच्चे में लगा दिया और वह बच्चा जीवित हो उठा, जिसका नाम उ...

रावण या राम

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वैसे तो हम सब ने रामायण की कहानी बचपन से सुन रखी है कि राम एक आदर्श, मर्यादापुरुषोत्तम, न्याय प्रिय राजा थे और रावण एक क्रूर, दानव, व्यभिचारी राजा था शोषण करना जिसका परम लक्ष्य था।  परंतु ये बातें कितनी सच है इसका अनुमान तभी लगाया जा सकता है जब आप इस कहानी को तार्किक दृष्टि से समझे न कि धार्मिक। क्योंकि जब तक आप इस कहानी को धार्मिक दृष्टिकोण से देखेंगे आपको राम महान और रावण नीच ही दिखेंगे लेकिन जैसे ही आप अपने तार्किक मस्तिष्क को इसपर विचार करने देंगे आपको पूरी कहानी उल्टी लगेगी। तो पहले बात करते है राम की जो अयोध्या के राजा दशरथ के चार पूतों में सबसे ज्येष्ठ पुत्र था जिसकी शिक्षा दीक्षा महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र के द्वारा गुरुकुल में हुई। विद्यार्जन के दौरान ही वो गुरु के संग जनक पुरी विहार को गया जहां सीता का स्वयंवर होना था , जिसमें उसने भी हिस्सा लिया और धनुष खंडित कर विजयी हो सीता से विवाह किया।  विवाह के उपरांत ही कुछ दिन बाद सौतेली मां के छल से उसे देश निकला गया और वो अपने अनुज लक्ष्मण व भार्या सीता के संग वन को प्रस्थान किया। जहां उसने कई वर्ष पूरे किए औ...

प्रकृति और दानव

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                      प्रकृति और दानव दुर्गा सप्तशती में जो व्याख्यान मिलता है की किस प्रकार एक असुर अपने लोभ से लालायित हो पूरे विश्व पर अधिकार करने लगा। उसने कई सिद्धियां एवं शक्तियां प्राप्त कर ली ताकी वह अजीत ,अमर और सर्वशक्तिवान बन पूरे विश्व पर राज कर सके।   असुर का घमंड बढ़ता ही गया और उसने धीरे धीरे सभी देवताओं को वश में करना शुरू कर दिया अग्नी देव, वरुण देव, पवन देव, इंद्र देव, मेघ देव सभी अपने सिंहासन छोड़ भागे और असुर एक एक कर उनके कार्यभार को अपने आधीन करने लगा।  पूरा स्वर्ग लोक जब असुर के आधीन हो गया तो पूरा विश्व त्राहिमाम त्राहिमाम करने लगा। इसपर सभी देवगण इकठ्ठा हुए और एक देवी का आवाहन किया, जब देवी प्रकट हुई तो सभी देवताओं ने उन्हें अपने अस्त्र शस्त्र और शक्तियां सौंप दी। देवी ने विकराल रूप लिया और महिष की भेष में छुपे असुर का अंत कर सभी को मुक्त किया। ये कहानी हम सभी ने सुनी है परन्तु अगर हम इसका गहन अध्यन करें तो हम पाएंगे कि ये कहानी प्रकृति और घमंड में डूबे उस हर मनुष्य के बीच द्वंद की है जो आज प्...