प्रकृति और दानव
प्रकृति और दानव दुर्गा सप्तशती में जो व्याख्यान मिलता है की किस प्रकार एक असुर अपने लोभ से लालायित हो पूरे विश्व पर अधिकार करने लगा। उसने कई सिद्धियां एवं शक्तियां प्राप्त कर ली ताकी वह अजीत ,अमर और सर्वशक्तिवान बन पूरे विश्व पर राज कर सके। असुर का घमंड बढ़ता ही गया और उसने धीरे धीरे सभी देवताओं को वश में करना शुरू कर दिया अग्नी देव, वरुण देव, पवन देव, इंद्र देव, मेघ देव सभी अपने सिंहासन छोड़ भागे और असुर एक एक कर उनके कार्यभार को अपने आधीन करने लगा। पूरा स्वर्ग लोक जब असुर के आधीन हो गया तो पूरा विश्व त्राहिमाम त्राहिमाम करने लगा। इसपर सभी देवगण इकठ्ठा हुए और एक देवी का आवाहन किया, जब देवी प्रकट हुई तो सभी देवताओं ने उन्हें अपने अस्त्र शस्त्र और शक्तियां सौंप दी। देवी ने विकराल रूप लिया और महिष की भेष में छुपे असुर का अंत कर सभी को मुक्त किया। ये कहानी हम सभी ने सुनी है परन्तु अगर हम इसका गहन अध्यन करें तो हम पाएंगे कि ये कहानी प्रकृति और घमंड में डूबे उस हर मनुष्य के बीच द्वंद की है जो आज प्...